सोमवार, 12 दिसंबर 2011

कुछ तो कहो, क्यों चुप रह्ते हो -1

बड़ी मुद्द्त बाद मिले हो
कुछ तो कहो
क्यों चुप रह्ते हो?


कई दिनों से
रस्ते पर तेरे
नज़रें टिकाए
तुझे तकते थे;
कुछ कहते थे
तूम ना आओगे;
पर दिल की जवाँ
धड़कन ले कर
साथ तेरे रहते थे।
क्या हुआ
क्यों उदास हो
क्यों बेख़बर दिखते हो?
कुछ तो कहो
क्यों चुप रह्ते हो?
©राजीव उपाध्याय

12 टिप्‍पणियां:

  1. Kiska hai ye tumko intzaar main hun na...
    bahut hi umda lines hain, but mujhe pata hai aap isse bhi bahut behtar likh sakte hi.. keep it up!!!!!

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार (07-10-2014) को "हमे है पथ बनाने की आदत" (चर्चा मंच:1759) (चर्चा मंच:1758) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच के सभी पाठकों को
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. बहुत-बहुत धन्यवाद शास्त्री जी कि आपने इतनी पुरानी रचना की ओर ध्यान दिया। सादर आभार आपको।

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  3. उत्तर
    1. प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद जोशी जी।

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  4. Bahut hi khubsurat prastuti ..aise hi likhate rahiye ..meri shubhkaaamnaayein aapko !!

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  5. अक्सर चुप रहने वाले कई बातें कर जाते हैं ....

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    1. जी चुप्पी अक्सर शब्दों से ज्यादा बातें करती है।

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