बुधवार, 24 सितंबर 2014

चलना मेरा काम

राही हूँ मैं, चलना मेरा काम
चलते जाना, है मेरा अन्जाम।
राही हूँ मैं, चलना मेरा काम॥

दौड़ लगाना, फिर हाँफ जाना
रुकना नहीं, है मेरा ईनाम।
दरिया और मरु, सब बेगाने
ज़ोर लगाना, मेरा इन्तज़ाम
राही हूँ मैं, चलना मेरा काम॥

हार जीत का, मतलब क्या
राह जब, है मेरा मुकाम।
थकना मैंने, सीखा ही नहीं
मिट जाना, है मेरा इन्तकाम।
राही हूँ मैं, चलना मेरा काम॥

© राजीव उपाध्याय

6 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. बहुत बहुत धन्यवाद मधु जी। जहाँ सुधार की गुंजाइश हो कृपया बताएं ताकि खुद को सुधार सकूँ। पुनश्च सादर धन्यवाद।

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  2. वाह बहुत खूब बेहतरीन रचना
    बधाई

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  3. जीवन चलने के लिए ही है ... उम्र भर बस चलते रहना ...

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    1. सादर धन्यवाद दिगमबर जी। अगर सुधार की गुंजाइश हो तो बताने का कष्ट करें।

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