सोमवार, 23 मार्च 2015

कोटि कोटि नमन कि आज हम आज़ाद हैं

आज शहीद-ए-आज़म भगत सिंह जी के शहादत पर कुछ महत्त्वपूर्ण उपलब्धियाँ रहीं हैं इस राष्ट्र की, इस समाज की। आज विद्वतजनों ने बहुत सारी पुरानी पड़ चुकीं परिभाषाओं एवं विमर्श के झाड़-फोछकर नये युग की नयी आवश्यकताओं के हिसाब से परिभाषित कर दिया है। उनके अथक प्रयासों के फलस्वरूप नास्तिकता, आस्तिकता, राष्ट्रवाद, जाति, धर्मनिरपेक्षता एवं सामाजिक समरसता जैसे महत्त्वपूर्ण विषयों पर बेहद ऊँचे दर्जे का ज्ञान संवर्धन हुआ है (वैसे कुछ समय पहले तक इनके लिए आस्तिकता, राष्ट्रवाद और जाति जैसे जुमले बजबजाती नाली से निकलते दुर्गंध के समान हुआ करता था)। यह पुरा राष्ट्र उनका आभारी है और साहित्य एवं विमर्श का तो पुनर्जन्म ही हो गया। वैसे भी तकरीबन पिछले सौ सालों से इन्होंने साहित्य के लिए बहुत कुछ किया है विचारधारा के तिनके के सहारे इस संसार के बड़वानल में। आपका शौर्य एवं पराक्रम देखकर शहीद-ए-आज़म भी उपर वाले को धन्यवाद कहते होंगे कि हे भगवन! (माफी चाहता हूँ। आप तो नास्तिक थे) अच्छा किया जो इन महावीरों के युग में पैदा नहीं किया नहीं तो हमें प्रमाणपत्र देने के लिए ये जाने क्या-क्या हमसे करवाते।
कोटि कोटि नमन आप सभी को कि आज हम आज़ाद हैं।

12 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छा लेख ...... आज भी जदा कुछ नहीं बदला हैं.....
    http://savanxxx.blogspot.in

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    1. हम राजनैतिक रुप से आजाद हैं बस। इससे अधिक कुछ नहीं

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  2. भगत सिंह और एनी क्रान्तिकारों की शहादत ने बहुत से नए प्रष्ट जोड़े थे समाज में ... कई बातों के तो उत्तर अज भी नहीं मिलते ... नमन है अमर राष्ट्र भक्तों का ...

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    1. हमने हर चीज के मायने ही बदल दिया है। जो पन्ने हमें पसन्द नहीं आये उन्हें हमने फाड़कर फेंक जो दिया। उस हर चीज को तार-तार कर दिया जो हमारे होने के मायने हमें बतलाते। नमन।

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  3. उनके आदर्शो को अपने जीवन में उतारना ही सच्ची श्रधान्जली होगी...

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  4. अति सुन्दर ,उन वीरों को सच्ची श्रद्धांजली

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